अंगप्रदेश लाइव संवाददाता
भागलपुर/बिहार- जगदीशपुर अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज मामलों के निष्पादन को लेकर कई आवेदकों ने कथित तौर पर अवैध राशि मांगने और आवेदन लंबित रखने के गंभीर आरोप लगाए हैं। आवेदकों एवं स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कथित रूप से नजराना नहीं देने पर कुछ मामलों को आपत्ति में डाल दिए जाने की शिकायत सामने आ रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

आवेदकों का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा के बावजूद कई दाखिल-खारिज मामलों का समय पर निष्पादन नहीं हो रहा है। कुछ मामलों में निजी ऑपरेटरों और बिचौलियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि निजी ऑपरेटर के माध्यम से कथित राशि पहुंचने के बाद ही कुछ मामलों में प्रक्रिया आगे बढ़ती है, जबकि राशि नहीं देने वाले आवेदकों के मामलों में आपत्ति दर्ज कर दी जाती है।

आवेदकों ने सवाल उठाया कि यदि दस्तावेजों में वास्तविक कमी है तो आपत्ति का स्पष्ट कारण नियमानुसार बताया जाना चाहिए। उनका कहना है कि बिना स्पष्ट कारण मामलों के आपत्ति में जाने से लोगों को बार-बार अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।

वहीं, स्थानीय सूत्रों के अनुसार अंचलाधिकारी के निजी आवास पर सुबह-शाम और देर रात निजी ऑपरेटरों के आने-जाने को लेकर भी चर्चा है। इस संबंध में भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। आवेदकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दाखिल-खारिज के निष्पादन की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग की है।
आवेदकों का कहना है कि यदि किसी आवेदन में दस्तावेजी कमी या आपत्ति है तो उसका स्पष्ट कारण दर्ज किया जाना चाहिए। वहीं, यदि किसी स्तर पर अवैध राशि की मांग की जा रही है तो इसकी जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

इस संबंध में अंचलाधिकारी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। अब वरीय राजस्व पदाधिकारियों की ओर से मामले की जांच और आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।








